मैराथन का क्रेज़: चीन में दौड़ कैसे बना रविवार की रस्म
चीन की किसी भी आम रविवार सुबह लाखों लोग दौड़ रहे होते हैं। बीजिंग, शंघाई और वुशी के बड़े सिटी मैराथन में कुछ हज़ार स्लॉट्स के लिए लाखों आवेदन आते हैं और सबसे लोकप्रिय इवेंट कुछ घंटों में भर जाते हैं। कईं के लिए बिब (रेस नंबर) पाना ही एक लॉटरी बन चुका है।
इस बूम को आगे बढ़ा रहे हैं शौकिया रनर, न कि प्रो एथलीट। रनिंग क्लब ऑफ़िस से पहले मिलते हैं, फ़िटनेस ऐप्स ट्रेनिंग प्लान संभालते हैं और मैराथन पूरा करना एक पीढ़ी के ऑफ़िस कर्मचारियों का साझा जीवन-लक्ष्य बन गया है। स्थानीय प्रशासनों ने ट्रेंड पकड़ा और अब शहर की पहचान और पर्यटन बढ़ाने के लिए रेसें होस्ट करने की होड़ में हैं।
इसकी अर्थव्यवस्था भी बड़ी है। स्पोर्ट्सवियर ब्रांड, घड़ी कंपनियाँ और स्पोर्ट्स ड्रिंक स्पॉन्सरशिप के लिए लड़ते हैं, जबकि ‘रेस ट्रैवल’ — दूसरे शहर उड़कर वहाँ का मैराथन दौड़ना और वीकेंड वहीं बिताना — अपने आप में छोटा उद्योग बन गया है।
यात्री भी शामिल हो सकते हैं। कई बड़ी रेसें में इंटरनेशनल एंट्री रखी जाती है और माहौल — सड़क किनारे चीयर करती भीड़, एनर्जी जेल से लेकर भाप के बन लुच्चे तक बाँटते वालंटियर — चीनी मैराथन को शहर देखने का अच्छा-खासा गर्मजोशी भरा तरीका बना देता है।